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16 साल के सचिन जब पहली बार लाहौर पहुंचे

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Sachin Tendulkar    सचिन तेंदुलकर एक ऐसा नाम है जो भारत और दुनिया भर में क्रिकेट का पर्याय है। उन्हें सर्वकालिक महान बल्लेबाजों में से एक माना जाता है और उन्होंने अपने शानदार करियर में कई यादगार पारियां खेली हैं। ऐसा ही एक यादगार लम्हा था जब वह पहली बार क्रिकेट दौरे पर लाहौर गए थे। यह वर्ष 1989 था, और सचिन सिर्फ 16 साल के थे जब वह पाकिस्तान के अपने पहले क्रिकेट दौरे के लिए लाहौर पहुंचे। भारतीय टीम का गर्मजोशी और आतिथ्य के साथ स्वागत किया गया और सचिन पहली बार पाकिस्तान में खेलने के लिए उत्साहित थे। पाकिस्तान में सचिन का पहला मैच पाकिस्तान की नेशनल बैंक क्रिकेट टीम के खिलाफ अभ्यास मैच था। उनके दौरे की शुरुआत अच्छी नहीं रही और पहली पारी में शून्य पर आउट हो गए। हालांकि, उन्होंने दूसरी पारी में इसकी भरपाई कर दी और केवल 38 गेंदों पर 35 रन की तेजतर्रार पारी खेली। वार्म-अप खेल में उनका प्रदर्शन इस बात का संकेत था कि बाकी दौरे में क्या आने वाला है। दौरे के पहले टेस्ट मैच में सचिन ने अपनी क्लास दिखाई और शानदार शतक जड़ा. उन्होंने बड़े संतुलन और आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी की और अपने पहल...

🍁🍁बाल गणेश 🍁🍁 प्रेरक कहानी Motivational Story In Hindi

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महानगर के उस अंतिम बसस्टॉप पर जैसे ही कंडक्टर ने बस रोक दरवाज़ा खोला, नीचे खड़े एक देहाती बुज़ुुर्ग ने चढ़ने के लिए हाथ बढ़ाया। एक ही हाथ से सहारा ले डगमगाते क़दमों से वे बस में चढ़े, क्योंकि दूसरे हाथ में थी भगवान गणेश की एक अत्यंत मनोहर बालमूर्ति थी। गांव जाने वाली उस आख़िरी बस में पांच-छह सवारों के चढ़ने के बाद पैर रखने की जगह भी जगह नहीं थी। बस चलने पर हाथ की मूर्ति को संभाल, उन्हें संतुलन बनाने की असफल कोशिश करते देख जब कंडक्टर ने अपनी सीट ख़ाली करते हुए कहा कि दद्दा आप यहां बैठ जाइए, तो वे उस मूर्ति को पेट से सटा आराम से उस सीट पर बैठ गए। कुछ ही मिनटों में बाल गणेश की वह प्यारी-सी मूर्ति सब के कौतूहल और आकर्षण का केन्द्र बन गई। अनायास कुछ जोड़ी हाथ श्रद्धा से उस ओर जुड़ गए। कंडक्टर पीछे के सवारों से पैसे लेता दद्दा के सामने आ खड़ा हुआ और पूछा, ‘कहां जाओगे दद्दा’ तो जवाब देते हुए मूर्ति को थोड़ा इधर-उधर कर उन्होंने धोती की अंटी से पैसे निकालने की असफल कोशिश की। उन्हें परेशान होता देखकर कंडक्टर ने कहा, ‘अभी रहने दीजिए। उतरते वक़्त दे दीजिएगा।’ और एक बार फिर दद्दा गणपति की मूर्ति को पेट से स...

सहायता प्रेरक कहानी Motivational Story In Hindi

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अपने मकान का नवीनीकरण करने के लिये, एक जापानी अपने मकान की दीवारों को तोड़ रहा था। जापान में लकड़ी की दीवारों के बीच ख़ाली जगह होती हैं, यानी दीवारें अंदर से पोली होती हैं। जब वह लकड़ी की दीवारों को चीर-तोड़ रहा था, तभी उसने देखा कि दीवार के अंदर की तरफ लकड़ी पर एक छिपकली, बाहर से उसके पैर पर ठुकी कील के कारण, एक ही जगह पर जमी पड़ी है। जब उसने यह दृश्य देखा तो उसे बहुत दया आई पर साथ ही वह जिज्ञासु भी हो गया। जब उसने आगे जाँच की तो पाया कि वह कील तो उसके मकान बनते समय पाँच साल पहले ठोंका गई थी! एक छिपकली इस स्थिति में पाँच साल तक जीवित थी! दीवार के अँधेरे पार्टीशन के बीच, बिना हिले-डुले? यह अविश्वसनीय, असंभव और चौंका देने वाला था! उसकी समझ से यह परे था कि एक छिपकली, जिसका एक पैर, एक ही स्थान पर पिछले पाँच साल से कील के कारण चिपका हुआ था और जो अपनी जगह से एक इंच भी न हिली थी, वह कैसे जीवित रह सकती है? अब उसने यह देखने के लिये कि वह छिपकली अब तक क्या करती रही है और कैसे अपने भोजन की जरुरत को पूरा करती रही है, अपना काम रोक दिया। थोड़ी ही देर बाद, पता नहीं कहाँ से, एक दूसरी छिपकली प्रकट हुई...

भूत रूपी मन! प्रेरक कहानी Motivational Story In Hindi

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  एक तांत्रिक ने एक बार एक भूत पकड़ लिया और उसे बेचने शहर गया ।संयोगवश उसकी मुलाकात एक सेठ से हुई,सेठ ने उससे पूछा - भाई यह क्या है, उसने जवाब दिया कि यह एक भूत है। इसमें अपार बल है, कितना भी कठिन कार्य क्यों न हो यह एक पल में निपटा देता है। यह कई वर्षों का काम मिनटों में कर सकता है ,सेठ भूत की प्रशंसा सुन कर ललचा गया और उसकी कीमत पूछी, उस आदमी ने कहा कीमत बस पाँच सौ रुपए है। कीमत सुन कर सेठ ने हैरानी से पूछा- बस पाँच सौ रुपए! उस आदमी ने कहा - सेठ जी जहाँ इसके असंख्य गुण हैं वहाँ एक दोष भी है। अगर इसे काम न मिले तो मालिक को खाने दौड़ता है। सेठ ने विचार किया कि मेरे तो सैकड़ों व्यवसाय हैं, विलायत तक कारोबार है, यह भूत मर जायेगा पर काम खत्म न होगा। यह सोच कर उसने भूत खरीद लिया, मगर भूत तो भूत ही था ,  उसने अपना मुंह फैलाया और बोला - काम  काम  काम  काम.......!! सेठ भी तैयार ही था, उसने भूत को तुरन्त दस काम बता दिये , पर भूत उसकी सोच से कहीं अधिक तेज था इधर मुँह से काम निकलता उधर पूरा होता , अब सेठ घबरा गया। संयोग से एक सन्त वहाँ आये। सेठ ने विनयपूर्वक उन्हें भूत की...

जीवन को कैसे जीयें ? माइकल जैक्सन का जीवन!

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माइकल जैक्सन 150 साल जीना चाहता था! किसी सेे साथ हाथ मिलाने से पहले दस्ताने पहनता था! लोगों के बीच में जाने से पहले मुंह पर मास्क लगाता था !  अपनी देख-रेख करने के लिए उसने अपने घर पर 12 डॉक्टर्स नियुक्त किए हुए थे !जो उसके सर के बाल से लेकर पांव के नाखून तक की जांच प्रतिदिन किया करते थे!  उसका खाना लैबोरेट्री में चेक होने के बाद उसे खिलाया जाता था! स्वयं को व्यायाम करवाने के लिए उसने 15 लोगों को रखा हुआ था!  माइकल जैकसन अश्वेत था,उसने 1987 में प्लास्टिक सर्जरी करवाकर अपनी त्वचा को गोरा बनवा लिया था! अपने काले मां-बाप और काले दोस्तों को भी छोड़ दिया, गोरा होने के बाद उसने गोरे मां-बाप को किराए पर लिया! और अपने दोस्त भी गोरे बनाए शादी भी गोरी औरतों के साथ की! नवम्बर 15 को माइकल ने अपनी नर्स डेबी रो से विवाह किया, जिसने प्रिंस माइकल जैक्सन जूनियर (1997) तथा पेरिस माइकल केथरीन (3 अपैल 1998) को जन्म दिया।  वो डेढ़ सौ साल तक जीने के लक्ष्य को लेकर चल रहा था! हमेशा ऑक्सीजन वाले बेड पर सोता था, उसने अपने लिए अंगदान करने वाले डोनर भी तैयार कर रखे थे! जिन्हें वह खर्चा देता था,...

जैसी करनी वैसी भरनी प्रेरक कहानी Motivational Story In Hindi

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  पुराने समय में एक राजा था। वह अक्सर अपने दरबारियों और मंत्रियों की परीक्षा लेता रहता था। एक दिन राजा ने अपने तीन मंत्रियों को दरबार में बुलाया और तीनो को आदेश दिया कि एक एक थैला लेकर बगीचे में जायें और वहाँ से अच्छे अच्छे फल तोड़ कर लायें। तीनो मंत्री एक एक थैला लेकर अलग अलग बाग़ में गए। बाग़ में जाकर एक मंत्री ने सोचा कि राजा के लिए अच्छे अच्छे फल तोड़ कर ले जाता हूँ ताकि राजा को पसंद आये। उसने चुन चुन कर अच्छे अच्छे फलों को अपने थैले में भर लिया। दूसरे मंत्री ने सोचा “कि राजा को कौनसा फल खाने है?” वो तो फलों को देखेगा भी नहीं। ऐसा सोचकर उसने अच्छे बुरे जो भी फल थे, जल्दी जल्दी इकठ्ठा करके अपना थैला भर लिया। तीसरे मंत्री ने सोचा कि समय क्यों बर्बाद किया जाये, राजा तो मेरा भरा हुआ थैला ही देखेगे। ऐसा सोचकर उसने घास फूस से अपने थैले को भर लिया। अपना अपना थैला लेकर तीनो मंत्री राजा के पास लौटे। राजा ने बिना देखे ही अपने सैनिकों को उन तीनो मंत्रियों को एक महीने के लिए जेल में बंद करने का आदेश दे दिया और कहा कि इन्हे खाने के लिए कुछ नहीं दिया जाये। ये अपने फल खाकर ही अपना गुजारा करेंगे.....

भगवान कहाँ रहते हैं?-प्रेरक कहानी Residense Of God Motivational Story In Hindi

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  एक ब्राह्मण था, वह घरों पर जाकर पूजा पाठ कर अपना जीवन यापन किया करता था। एक बार उस ब्राह्मण को नगर के राजाके महल से पूजा के लिये बुलावा आया। वह ब्राह्मण राजमहल का बुलावा पाकर खुशी-खुशी पूजा करने गया। पूजा सम्पन्न कराकर जब ब्राह्मण घर को आने लगा, तब राजाने ब्राह्मण से एक सवाल किया, "हे ब्राह्मण देव ! आप भगवान की पूजा करते हैं तो यह बताये की भगवान कहाँ रहते हैं ? उनकी नजर किस ओर है, और भगवान क्या कर सकते हैं ?" राजाके प्रश्न सुन ब्राह्मण अचंभित हो गया और कुछ समय विचार करने के बाद राजा से कहा, "हे राजन ! इस सवाल के जवाब के लिए मुझे समय दीजिए।" राजा ने ब्राह्मणको एक माह का समय दिया। ब्राह्मण प्रतिदिन इसी सोच में उलझा रहता कि इसका जवाब क्या होगा। ऐसा करते-करते समय बीतता गया और कुछ ही दिन शेष रह गये। समय बीतने के साथ ब्राह्मण की चिंता भी बढ़ने लगी और जवाब नही मिलने के कारण ब्राह्मण उदास रहने लगा। एक दिन ब्राह्मण को चिंतित देख ब्राह्मणके पुत्रने कहा, पिता जी आप इतने उदास क्यों हैं। तब ब्राह्मण ने कहा, "बेटा ! कुछ दिनों पहले में पूजा कराने राजमहल गया हुआ था, पूजा सम्...

अंधा कुआं राजा भोज का प्रेरक प्रसंग Motivational Story Hindi Raja Bhoj

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एक बार राजा भोज के दरबार में एक सवाल उठा कि ऐसा कौन सा कुआं है जिसमें गिरने के बाद आदमी बाहर नहीं निकल पाता? इस प्रश्न का उत्तर कोई नहीं दे पाया। आखिर में राजा भोज ने राज पंडित से कहा कि इस प्रश्न का उत्तर सात दिनों के अंदर लेकर आओ, वरना आपको अभी तक जो इनाम धन आदि दिया गया है,वापस ले लिए जायेंगे तथा इस नगरी को छोड़कर दूसरी जगह जाना होगा। छः दिन बीत चुके थे।राज पंडित को जबाव नहीं मिला था।निराश होकर वह जंगल की तरफ गया। वहां उसकी भेंट एक गड़रिए से हुई। गड़रिए ने पूछा - आप तो राजपंडित हैं, राजा के दुलारे हो फिर चेहरे पर इतनी उदासी क्यों? यह गड़रिया मेरा क्या मार्गदर्शन करेगा?सोचकर पंडित ने कुछ नहीं कहा।इसपर गडरिए ने पुनः उदासी का कारण पूछते हुए कहा - पंडित जी हम भी सत्संगी हैं,हो सकता है आपके प्रश्न का जवाब मेरे पास हो, अतः नि:संकोच कहिए। राज पंडित ने प्रश्न बता दिया और कहा कि अगर कलतक प्रश्न का जवाब नहीं मिला तो राजा नगर से निकाल देगा। गड़रिया बोला - मेरे पास पारस है उससे खूब सोना बनाओ। एक भोज क्या लाखों भोज तेरे पीछे घूमेंगे।बस,पारस देने से पहले मेरी एक शर्त माननी होगी कि तुझे मेरा चेला ...

कच्ची पक्की का फ़र्क़ -सरदार पटेल Motivational Life Event In Hindi

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  उत्तर भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी यह परंपरा है कि घर पर किसी विशिष्ट आगंतुक के आने पर रोटी सब्जी दाल चावल जैसा सामान्य भोजन न बनाकर अतिथि के सम्मान में पूरी कचौरी आदि विशेष भोजन बनाया जाता है। इसे आम बोलचाल में पक्की रसोई कहा जाता है। कच्ची और पक्की रसोई से जुड़ा एक रोचक संस्मरण विनोबा जी के सहयोगी गौतम बजाज के सौजन्य से सुनने को मिला जब वे हरदोई सी. एस. एन. कालेज में एक विचार गोष्ठी को सम्बोधित करने आये थे। उन्होंने यह किस्सा कुछ इस प्रकार बताया:सरदार पटेल एक बार संत विनोवा जी के आश्रम गये जहां उन्हें भोजन भी ग्रहण करना था। आश्रम की रसोई में उत्तर भारत के किसी गांव से आया कोई साधक भोजन व्यवस्था से जुड़ा था। सरदार पटेल को आश्रम का विशिष्ठ अतिथि जानकर उनके सम्मान में साधक ने सरदार जी से पूछा लिये कि आप के लिये रसोई पक्की अथवा कच्ची। सरदार पटेल इसका अर्थ न समझ सके तो साधक से इसका अभिप्राय पूछा तो साधक ने अपने आशय को कुछ और स्पष्ठ करते हुये कहा कि वे कच्चा खाना खायेगे अथवा पक्का यह सुनकर सरदार जी ने तपाक से उत्तर दिया कि कच्चा क्यों खायेंगे पक्का ही खायेंगे| खाना बनने के बाद ...

महान कृष्ण भक्त सूरदास Motivational Story In Hindi krishna -surdas

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दोस्तों, एक बार सूरदास जी कहीं जा रहे थे, चलते चलते मार्ग में एक गढ्ढा आ गया और सूरदास जी उसमें गिर गए और जैसे ही गढ्ढे में गिरे तो किस को पुकारते? अपने कान्हा को ही पुकारने लगे, भक्त जो ठहरे। एक भक्त अपने जीवन में मुसीबत के समय में प्रभु को ही पुकारता है, और पुकारने लगे की अरे मेरे प्यारे छोटे से कन्हैया आज तूने मुझे यहाँ भेज दिया और अब क्या तू यहाँ नहीं आएगा? मुझे अकेला ही छोड़ देगा क्या?और, जिससमय सूरदास जी ने कान्हा को याद किया तो आज प्रभु भी उसकी पुकार सुने बिना नहीं रह पाए! सच है जब एक भक्त दिल से पुकारता है तो यह टीस प्रभु के दिल में भी उठा करती है और आज कान्हा भी उसी समय एक बाल गोपाल के रूप में वंहा प्रकट हो गए, और प्रभु के पांव की नन्ही नन्ही सी पैजनिया जब छन छन करती हुई सूरदास जी के पास आई तो सूरदास जी को समझते देर न लगी।कान्हा उनके समीप आये और बोले अरे बाबा नीचे क्या कर रहे हो, लो मेरा हाथ पकड़ो और जल्दी से उपर चले आओ। जेसे ही सूरदास जी ने इतनी प्यारी सी मिश्री सी घुली हुई वाणी सुनी, तो जान गए की मेरा कान्हा आ गया, और बहुत प्रसन्न हो गए, और कहने लगे की अच्छा कान्हा, बाल गोपा...

निस्वार्थ सेवा-प्रेरक कहानी-Motivational Story In Hindi

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एक मजदूर नया नया दिल्ली आया।पत्नी को किराए के मकान मे छोडकर काम की तलाश मे निकला।एक जगह गुरुद्वारे में सेवा चल रही थी। कुछ लडकों को काम करते देखा उनसे पूछा-"क्या मैं यहाँ काम कर सकता हूँ?" लडको ने 'हाँ' कहा। मजदूर-"तुम्हारे मालिक कहाँ हैं?" लडको को शरारत सूझी और बोले-"मालिक बाहर गया है। तुम बस काम पर लग जाओ।हम बता देंगे कि आज से लगे हो।"मजदूर खुश हुआ और काम करने लगा।रोज सुबह समय से आता शाम को जाता।पूरी मेहनत लगन से काम करता।ऐसे हफ्ता निकल गया। मजदूर ने फिर लडकों से पूछा-"मालिक कब आयेंगे?" लडकों ने फिर हफ्ता कह दिया। फिर से हफ्ता निकल गया। मजदूर लडकों से बोला-"भैया आज तो घरपर खाने को कुछ नही, पत्नी बोली कुछ पैसे लाओगे तभी खाना बनेगा।मालिक से हमें मिलवा दो। "लडकों ने बात अगले दिन तक टाल दी।मगर मजदूर के जाते ही उन्हें अपनी गलती का एहसास होने लगा और उन्होने आखिर फैसला किया कि वो मजदूर को सबकुछ सच सच बता देंगे। ये गुरूदा्रे की सेवा है। यहाँ कोई मालिक नहीं।ये तो हम अपने गुरु महाराज जी की सेवा कर रहे हैं। अगले दिन मजदूर आया तो सभी लडको...

Motivational Story Of Infosys Chairman Sudha Murty इंफोसिस चेयरमैन सुधा मूर्ति जी के जीवन का प्रेरक किस्सा

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दोस्तों आज की कहानी ऐसी है जिसको पढ़ने के बाद शायद आप भी अपनी ज़िंदगी जीने का अंदाज़ बदलना चाहें । मुंबई से बैंगलुरू जा रही ट्रेन में सफ़र के दौरान टीसी ने सीट के नीचे छिपी लगभग तेरह/चौदह साल की एक लड़की से कहा- टीसी- "टिकट कहाँ है?" काँपती हुई लडकी-"नहीं है साहब।" टी सी-"तो गाड़ी से उतरो।" इसका टिकट मैं दे रही हूँ।............पीछे से एक सह यात्री ऊषा भट्टाचार्य की आवाज आई, जो पेशे से प्रोफेसर थी । ऊषा जी - "तुम्हें कहाँ जाना है ?" लड़की - "पता नहीं मैम!" ऊषा जी - "तब मेरे साथ चलो, बैंगलोर तक!" ऊषा जी - "तुम्हारा नाम क्या है?" लड़की - "चित्रा" बैंगलुरू पहुँच कर ऊषाजी ने चित्रा को अपनी जान पहचान की एक स्वंयसेवी संस्था को सौंप दिया और एक अच्छे स्कूल में भी एडमीशन करवा दिया।जल्द ही ऊषा जी का ट्रांसफर दिल्ली हो गया जिसके कारण चित्रा से संपर्क टूट गया, कभी-कभार केवल फोन पर बात हो जाया करती थी।करीब बीस साल बाद ऊषाजी को एक लेक्चर के लिए सेन फ्रांसिस्को (अमरीका) बुलाया गया ।लेक्चर के बाद जब वह होटल का बिल देने रिसेप्शन प...

प्रेरक किस्सा-जब ओमान की किंग ने भारतीय राष्ट्रपति के लिए खुद कार चलाई Motivational Story in Hindi

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1994 में भारतीय राष्ट्रपति श्री शंकर दयाल शर्मा ने आधिकारिक यात्रा पर मस्कट का दौरा किए थे उस वक्त एयर इंडिया की उड़ान में 3 दुर्लभ घटनाएं हुईं थी: 1) ओमान किंग कभी भी किसी भी देश के गणमान्य व्यक्तियों को लेने के लिए हवाई अड्डे नहीं जाते हैं – कभी भी नहीं, लेकिन ओमान किंग सुल्तान कबूस राष्ट्रपति को लेने के लिए हवाई अड्डे पर खुद आए| 2) जब फ्लाइट ओमान में उतरा तो सुल्तान उनके सीट तक गए और राष्ट्रपति को उनकी सीट से खुद उठाकर नीचे उतारा। 3) एयर इंडिया विमान से उतरने के बाद नीचे कार के पास ड्राईवर खड़ा था उनको लेने के लिए, लेकिन ओमान किंग ने ड्राईवर को छोड़ दिया और स्वयं ड्राईवर के रूप में कार में बैठ गए और राष्ट्रपति को बैठाकर खुद कार चला कर उन्हें ले गए। बाद में जब संवाददाताओं ने सुल्तान से सवाल किया कि उन्होंने इतने सारे प्रोटोकॉल क्यों तोड़ दिए? सुल्तान ने जवाब दिया, “मैं श्री शर्मा को लेने के लिए हवाई अड्डे पर  इसलिए नहीं गया क्योंकि वह भारत के राष्ट्रपति थे, मैंने भारत में अध्ययन किया और कई चीजें सीखीं, जब मैं पुणे में पढ़ रहा था, श्री शर्मा मेरे प्रोफेसर थे – यही कारण है कि मैंने...

कहानी-बुद्धिमान साधु Motivational story in Hindi

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 किसी राजमहल के द्वारा पर एक साधु आया और द्वारपाल से बोला कि भीतर जाकर राजा से कहे कि उनका भाई आया है।द्वारपाल ने समझा कि शायद ये कोई दूर के रिश्ते में राजा का भाई हो जो संन्यास लेकर साधुओं की तरह रह रहा हो! सूचना मिलने पर राजा मुस्कुराया और साधु को भीतर बुलाकर अपने पास बैठा लिया।साधु ने पूछा – कहो अनुज*, क्या हाल-चाल हैं तुम्हारे?“मैं ठीक हूँ आप कैसे हैं भैया?”, राजा बोला। साधु ने कहा- जिस महल में मैं रहता था, वह पुराना और जर्जर हो गया है। कभी भी टूटकर गिर सकता है। मेरे 32 नौकर थे वे भी एक-एक करके चले गए। पाँचों रानियाँ भी वृद्ध हो गयीं और अब उनसे को काम नहीं होता… यह सुनकर राजा ने साधु को 10 सोने के सिक्के देने का आदेश दिया।साधु ने 10 सोने के सिक्के कम बताए।तब राजा ने कहा, इस बार राज्य में सूखा पड़ा है, आप इतने से ही संतोष कर लें। साधु बोला- मेरे साथ सात समुन्दर पार चलो वहां सोने की खदाने हैं। मेरे पैर पड़ते ही समुद्र सूख जाएगा… मेरे पैरों की शक्ति तो आप देख ही चुके हैं।अब राजा ने साधु को 100 सोने के सिक्के देने का आदेश दिया। साधु के जाने के बाद मंत्रियों ने आश्चर्य से पूछा, “ क्षम...

श्रम का महत्व Dignity Of Labour-Abraham Lincoln के जीवन का प्रेरक किस्सा

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बात उस समय की है जब अब्राहम लिंकन राष्ट्रपति नही बने थे। उस समय जाति पाती का भेदभावपूर्ण व्यवहार होता था।  अब्राहम लिंकन के पिता जूते बनाते थे, जब वह राष्ट्रपति चुने गये तो अमेरिका के अभिजात्य वर्ग को बड़ी ठेस पहुँची! सीनेट के समक्ष जब वह अपना पहला भाषण देने खड़े हुए तो एक सीनेटर ने ऊँची आवाज़ में कहा,मिस्टर लिंकन याद रखो कि तुम्हारे पिता मेरे और मेरे परिवार के जूते बनाया करते थे! इसी के साथ सीनेट भद्दे अट्टहास से गूँज उठी! लेकिन लिंकन किसी और ही मिट्टी के बने हुए थे! उन्होंने कहा कि, मुझे मालूम है कि मेरे पिता जूते बनाते थे! सिर्फ आप के ही नहीं यहाँ बैठे कई माननीयों के जूते उन्होंने बनाये होंगे! वह पूरे मनोयोग से जूते बनाते थे, उनके बनाये जूतों में उनकी आत्मा बसती है! अपने काम के प्रति पूर्ण समर्पण के कारण उनके बनाये जूतों में कभी कोई शिकायत नहीं आयी! क्या आपको उनके काम से कोई शिकायत है? उनका पुत्र होने के नाते मैं स्वयं भी जूते बना लेता हूँ और यदि आपको कोई शिकायत है तो मैं उनके बनाये जूतों की मरम्मत कर देता हूँ! मुझे अपने पिता और उनके काम पर गर्व है! सीनेट में उनके ये तर्कवादी भा...

कहानी-सच्चा मित्र- सुदामा की दरिद्रता का रहस्य Motivational Story In Hindi

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मेरे मन में सुदामा के सम्बन्ध में एक बड़ी शंका थी कि एक विद्वान् ब्राह्मण अपने बाल सखा कृष्ण से छुपाकर चने कैसे खा सकता है ?आज भागवत के इस प्रसंग  में छुपे रहस्य को आपसे साझा करना जरुरी समझता हूँ ताकि आप भी समाज में फैली इस भ्रान्ति को दूर कर सकें। गुरुदेव बताते हैं सुदामा की दरिद्रता और चने की चोरी के पीछे एक बहुत ही रोचक और त्याग-पूर्ण कथा है - एक अत्यंत गरीब निर्धन बुढ़िया भिक्षा माँग कर जीवन यापन करती थी। एक समय ऐसा आया कि पाँच दिन तक उसे भिक्षा नही मिली वह प्रति दिन पानी पीकर भगवान का नाम लेकर सो जाती थी। छठवें दिन उसे भिक्षा में दो मुट्ठी चने मिले। कुटिया पे पहुँचते-पहुँचते उसे रात हो गयी। बुढ़िया ने सोंचा अब ये चने रात मे नही, प्रात:काल वासुदेव को भोग लगाकर खाऊँगी । यह सोंचकर उसने चनों को कपडे में बाँधकर रख दिए और वासुदेव का नाम जपते-जपते सो गयी। बुढ़िया के सोने के बाद कुछ चोर चोरी करने के लिए उसकी कुटिया मे आ गये। चोरों ने चनों की पोटली देख कर समझा इसमे सोने के सिक्के हैं अतः उसे उठा लिया। चोरो की आहट सुनकर बुढ़िया जाग गयी और शोर मचाने लगी।शोर-शराबा सुनकर गाँव के सारे लोग चोरों ...

अपना-अपना दृष्टिकोण-Motivational story in hindi

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एक बार की बात है , एक   नवविवाहित जोड़ा किसी किराए के घर में रहने पहुंचा। अगली सुबह , जब वे नाश्ता कर रहे थे , तभी पत्नी ने खिड़की से देखा कि सामने वाली छत पर कुछ कपड़े फैले हैं , – “ लगता है इन लोगों को कपड़े साफ़ करना भी नहीं आता …ज़रा देखो तो कितने मैले लग रहे हैं ? “  पति ने उसकी बात सुनी पर अधिक ध्यान नहीं दिया   एक -दो दिन बाद फिर उसी जगह कुछ कपड़े फैले थे। पत्नी ने उन्हें देखते ही अपनी बात दोहरा दी ….” कब सीखेंगे ये लोग की कपड़े कैसे साफ़ करते हैं …!!”  पति सुनता रहा पर इस बार भी उसने कुछ नहीं कहा पर अब तो ये आये दिन की बात हो गयी। जब भी पत्नी कपडे फैले देखती भला -बुरा कहना शुरू हो जाती। लगभग एक महीने बाद वे यूँ हीं बैठ कर नाश्ता कर रहे थे। पत्नी ने हमेशा की तरह नजरें उठायीं और सामने वाली छत की तरफ देखा , ” अरे वाह , लगता है इन्हें अकल आ ही गयी …आज तो कपडे बिल्कुल साफ़ दिख रहे हैं , ज़रूर किसी ने टोका होगा !” पति बोल , ” नहीं उन्हें किसी ने नहीं टोका।” ” तुम्हे कैसे पता ?” , पत्नी ने आश्चर्य से पूछा। ” आज मैं सुबह जल्दी उठ गया था और मैंने इस खिड़की प...

कुछ भी असंभव नहीं-मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी

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एक समय की बात है किसी राज्य में एक राजा का शासन था। उस राजा के दो बेटे थे – अवधेश और विक्रम। एक बार दोनों राजकुमार जंगल में शिकार करने गए। रास्ते में एक विशाल नदी थी। दोनों राजकुमारों का मन हुआ कि क्यों ना नदी में नहाया जाये।यही सोचकर दोनों राजकुमार नदी में नहाने चल दिए। लेकिन नदी उनकी अपेक्षा से कहीं ज्यादा गहरी थी। विक्रम तैरते तैरते थोड़ा दूर निकल गया, अभी थोड़ा तैरना शुरू ही किया था कि एक तेज लहर आई और विक्रम को दूर तक अपने साथ ले गयी।विक्रम डर से अपनी सुध बुध खो बैठा गहरे पानी में उससे तैरा नहीं जा रहा था अब वो डूबने लगा था। अपने भाई को बुरी तरह फँसा देख के अवधेश जल्दी से नदी से बाहर निकला और एक लड़की का बड़ा लट्ठा लिया और अपने भाई विक्रम की ओर उछाला।लेकिन दुर्भागयवश विक्रम इतना दूर था कि लकड़ी का लट्ठा उसके हाथ में नहीं आ पा रहा था।इतने में सैनिक वहां पहुँचे और राजकुमार को देखकर सब यही बोलने लगे – अब ये नहीं बच पाएंगे , यहाँ से निकलना नामुनकिन है। यहाँ तक कि अवधेश को भी ये अहसास हो चुका था कि अब विक्रम नहीं बच सकता, तेज बहाव में बचना नामुनकिन है, यही सोचकर सबने हथियार डाल दिए और कोई ब...

सच्ची प्रार्थना-मोटिवेशनल स्टोरी

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एक छोटा बच्चा था, बहुत ही नेक और बुद्धिमान था| एक दिन वो मंदिर में गया। मंदिर के अन्दर सभी भक्त, भगवान के मंत्र बोल रहे थे। कुछ भक्त स्तुतिगान भी कर रहे थे। कुछ भक्त संस्कृत के काफी कठिन श्लोक भी बोल रहे थे। बच्चे ने कुछ देर यह सब देखा और उसके चहेरे पर उदासी छा गयी। क्योंकि उसे यह सब प्रार्थना और मंत्र बोलना आता नहीं था। कुछ देर वहाँ खड़ा रहा उसने अपनी आँखे बन्द की, अपने दोनों हाथ जोड़े और बार-बार "क-ख-ग-घ" बोलने लगा। मंदिर के पुजारी ने यह देखा उसने लड़के से पूछा कि "बेटे तुम यह क्या कर रहे हो, बच्चे ने कहा भगवान की पूजा"। पुजारी ने कहा की "बेटे भगवान से इस तरह से प्रार्थना नहीं की जा सकती, तुम तो क-ख-ग-घ बोल रहे हो।”  पंडित पुजारी की कोई गलती भी नहीं क्योंकि उनकी तो पूजा भी रटी रटाई होती है। भाव का तो मिश्रण होता ही नहीं लेकिन बच्चा मासूम है, उसके पास शब्द तो थे नहीं सो भाव से क ख ग घ ही बोलने लगा। लड़के ने उत्तर दिया की "मुझे प्रार्थना, मंत्र, भजन नहीं आते, मुझे सिर्फ क-ख-ग-घ ही आती है। मुझे मेरे पिताजी ने घर में पढ़ाते वक्त यह बताया था कि सारे शब्द इसी क...

लायक नालायक का फर्क -- प्रेरक कहानी

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  देर रात अचानक ही पिता जी की तबियत बिगड़ गयी। आहट पाते ही उनका नालायक बेटा उनके सामने था।माँ ड्राईवर बुलाने की बात कह रही थी, पर उसने सोचा अब इतनी रात को इतना जल्दी ड्राईवर कहाँ आ पायेगा ? यह कहते हुये उसने सहज जिद और अपने मजबूत कंधो के सहारे बाऊजी को कार में बिठाया और तेज़ी से हॉस्पिटल की ओर भागा।बाउजी दर्द से कराहने के साथ ही उसे डांट भी रहे थे  "धीरे चला नालायक, एक काम जो इससे ठीक से हो जाए।" नालायक बेटा बोला  "आप ज्यादा बातें ना करें बाउजी, बस तेज़ साँसें लेते रहिये, हम हॉस्पिटल पहुँचने वाले हैं।"  अस्पताल पहुँचकर उन्हे डाक्टरों की निगरानी में सौंप,वो बाहर चहलकदमी करने लगाबचपन से आज तक अपने लिये वो नालायक ही सुनते आया था।उसने भी कहीं न कहीं अपने मन में यह स्वीकार कर लिया था की उसका नाम ही शायद नालायक ही हैं ।तभी तो स्कूल के समय से ही घर के लगभग सब लोग कहते थे की नालायक फिर से फेल हो गया। नालायक को अपने यहाँ कोई चपरासी भी ना रखे।कोई बेवकूफ ही इस नालायक को अपनी बेटी देगा। शादी होने के बाद भी वक्त बेवक्त सब कहते रहते हैं की इस बेचारी के भाग्य फूटें थे जो इस नालायक...